भाइयों और बहनों… आज की यह कथा किसी एक इंसान की नहीं, यह कथा है सम्मान की लड़ाई की। एक समय था, जब इंसान को इंसान नहीं समझा जाता था। उसी अंधेरे में जन्म लिया डॉ. भीमराव अंबेडकर ने। बचपन में अपमान मिला, पानी तक छूने नहीं दिया गया, लेकिन बाबा साहब ने हार नहीं मानी। उन्होंने कहा— “शिक्षा शेरनी का दूध है।”