"सलाम अलैकुम बेटे इफ्तिखार… कैसे हो मेरे लाल? अल्लाह तुम्हें हमेशा खुशियाँ दे, तकलीफ़ों से दूर रखे। बेटा… मैं तो बस एक माँ हूँ… दिल में एक ही परेशानी है… इसी लिए हिम्मत करके आपको आवाज़ दी है। जो बात यासिर ने आपसे की थी… अगर उसके बारे में कोई उम्मीद… कोई खबर हो… तो मुझे ज़रूर बता देना बेटा। मेरी दुआएँ हमेशा तुम्हारे साथ हैं… अल्लाह तुम्हारे हर कदम में बरकत डाले… और तुम्हें दुनिया और आख़िरत की कामयाबियाँ दे।"