एक पल के लिए सोचिए। आज से चौदह सौ साल पहले। एक ऐसा शहर जहाँ कबीले एक-दूसरे का खून बहाते थे। जहाँ नफरत की जड़ें इतनी गहरी थीं कि एक बाप अपने बेटे के कातिल से सदियों तक बदला लेता रहता था। जहाँ यहूदी, मुसलमान और मुशरिक — सब एक ही जमीन पर रहते थे, मगर हर तरफ डर और बेइतमादी का साया था।