एक छोटे से गाँव में दीया नाम की एक लड़की रहती थी। उसके घर की हालत बहुत अच्छी नहीं थी, लेकिन उसकी आँखों में सपनों की चमक हमेशा रहती थी। दीया को पढ़ना बहुत पसंद था। हर शाम वह मिट्टी के दिए की रोशनी में किताबें पढ़ती, क्योंकि घर में बिजली नहीं थी। गाँव के लोग अक्सर उससे कहते, “इतनी पढ़ाई करके क्या करोगी? आखिर में तो घर ही संभालना है।” दीया मुस्कुरा कर चुप हो जाती, लेकिन उसके मन में एक ही बात गूँजती रहती—