कुछ नहीं हो पा रहा है मुझसे… क्या मैं करूँ? कोई नहीं सुनना चाहता मुझको… क्या मैं करूँ? हालातों से नहीं लड़ पा रहा हूँ… क्या मैं करूँ? टूट चुका काँचों सा मैं… जुड़ के ही अब क्या मैं करूँ… — सच की टहनी भी जा चुकी है… उम्मीद की नाव भी डूबने वाली है… माँ को मैं कैसे दूँगा इस जवाब को… सक्सेस की डोर भी टूटने वाली है…