“अकाउंट में सिर्फ ₹48,000 थे… रिश्तेदारों ke फोन शुरू हो गए…” उसी अस्पताल में एक और परिवार था… उनके पास Health Insurance था।” “दोनों के आँसू एक जैसे थे… फर्क सिर्फ इतना था कि एक परिवार पैसे ढूँढ रहा था, दूसरा इलाज पर ध्यान दे रहा था।” “बीमारी अमीर-गरीब देखकर नहीं आती… लेकिन तैयारी इंसान खुद करता है।” “मैं पवन दीक्षित हूँ। कोशिश यही है कि किसी परिवार को इलाज से पहले पैसों की चिंता न करनी पड़े।”