शुरुआत में एक क्लासरूम का सीन है जहाँ एक लड़की बहुत खुश है। वो कहती है कि अब स्कूल के फाइनल एग्जाम खत्म हो गए हैं, तो अब वो आराम से मैथ्स (गणित) की क्लास में सो सकती है। क्लास के बाकी बच्चों को भी लगता है कि वो पढ़ाई में सबसे होशियार है और मैथ्स उसके लिए बच्चों का खेल है। अगले सीन में वो लड़की कॉलेज पहुँच जाती है और अपनी एक टीचर के पास जाकर ज़िद करती है कि उसे एक खास प्रोजेक्ट दे दिया जाए। टीचर उसे समझाती है कि अभी वो फर्स्ट ईयर (पहले साल) में है, इसलिए ये उसके लिए बहुत जल्दी है। तभी वहाँ एक सीनियर लड़का आता है जिसके पास पहले से वो प्रोजेक्ट होता है। टीचर दोनों को सुझाव देती है कि वे दोनों मिलकर इस प्रोजेक्ट पर काम करें। लड़की को उस सीनियर के साथ काम करना पसंद नहीं आता। वो लाइब्रेरी में लैपटॉप पर अकेले काम करते हुए सोचती है कि जल्दी से इसे खत्म करके उस सीनियर से छुटकारा पा लेगी। तभी वो सीनियर वहाँ आता है और उसकी कैलकुलेशन में गलती पकड़ लेता है। वो कहता है कि ये तो फर्स्ट ईयर का मैथ्स है, क्या तुम्हें ये भी नहीं आता? वो मदद करने की पेशकश करता है, लेकिन लड़की घमंड में मना कर देती है। कुछ दिन बाद, क्लास में मैथ्स का रिजल्ट आता है। लड़की अपना फोन चेक करती है और हैरान रह जाती है—वो फेल हो गई है! जब बाकी बच्चे उससे उसके नंबर पूछते हैं, तो वो शर्म के मारे रोते हुए क्लास से भाग जाती है। बाहर दालान में वही सीनियर लड़का उसे भागते हुए देखता है और मज़ाक उड़ाते हुए कहता है, "पीछे से फर्स्ट आई हो, तुम्हारे साथ ऐसा ही होना चाहिए था।" बाद में, लड़की उदास होकर बाहर एक बेंच पर बैठी होती है। वो सीनियर लड़का उसके पास आता है और उसे एक अच्छी सलाह देता है। वो कहता है, "स्कूल के एग्जाम खत्म होने का मतलब यह नहीं है कि मेहनत करना भी खत्म हो गया। अपना ये घमंड छोड़ दो, कॉलेज एक नई शुरुआत है।" लड़की को अपनी गलती का एहसास होता है। अगली बार जब सीनियर लड़का वहाँ से गुज़रता है, तो लड़की अपनी मैथ्स की किताब लेकर उसे रोकती है और झिझकते हुए पूछती है, "क्या तुम मुझे मैथ्स पढ़ा सकते हो?" लड़का मुस्कुरा कर मान जाता है। इसके बाद दिखाया जाता है कि दोनों साथ मिलकर पढ़ाई कर रहे हैं, वो लड़का उसे लैपटॉप पर चीज़ें समझा रहा है और लड़की अब क्लास में भी पूरे कॉन्फिडेंस के साथ सवालों के जवाब दे रही है। उनकी मेहनत रंग लाती है और दोनों मिलकर एक बड़ा कॉलेज कॉम्पिटिशन जीत जाते हैं और उन्हें एक बड़ी सी ट्रॉफी मिलती है। लड़की खुश होकर उस सीनियर को शुक्रिया कहती है कि उसी की वजह से वे जीत पाए। लेकिन लड़का कहता है, "असल में तुम्हें मेरा नहीं, किसी और का शुक्रिया अदा करना चाहिए।" लड़की कंफ्यूज हो जाती है, तभी उनकी वही टीचर वहाँ आ जाती है। कहानी में एक फ्लैशबैक दिखाया जाता है—असल में उस टीचर को पता था कि लड़की में टैलेंट है लेकिन वो बहुत घमंडी हो गई है। इसलिए टीचर ने ही उस सीनियर लड़के को डांट-डपट कर राज़ी किया था कि वो उस लड़की की मदद करे और उसे सही रास्ता दिखाए। फ्लैशबैक में यह भी दिखता है कि टीचर ने एक बार छुपकर उन दोनों को बहुत करीब बैठकर पढ़ाई करते हुए देख लिया था और वो मुस्कुरा रही थी। वापस वर्तमान में, टीचर उन दोनों को चिढ़ाते हुए सीधे पूछती है, "तो तुम दोनों मुझे अपनी शादी की दावत कब दे रहे हो?" यह सुनकर लड़की बुरी तरह शरमा जाती है और हड़बड़ा कर कहती है कि टीचर गलत समझ रही हैं। लेकिन वो सीनियर लड़का मुस्कुराता है और पीछे से प्यार से लड़की के कंधे पर हाथ रख लेता है, और वीडियो खत्म हो जाता है। अगले पार्ट के लिए लाइक और सब्सक्राइब कर लो