"स्त्री... एक रहस्य है। उसे समझने की जल्दी मत करो... उसे महसूस करो। उसके भीतर प्रेम है... करुणा है... सृजन की अद्भुत शक्ति है। वह केवल शरीर नहीं... एक चेतना है। जिस समाज ने स्त्री का सम्मान किया... वहाँ सौंदर्य खिला, संवेदनशीलता जागी। स्त्री को किसी की छाया बनकर जीने की आवश्यकता नहीं है। उसे अपने भीतर के प्रकाश को पहचानना है... अपनी स्वतंत्रता को जीना है। पुरुष और स्त्री विरोधी नहीं हैं... वे एक-दूसरे के पूरक हैं। जब दोनों अपने वास्तविक स्वरूप में खिलते हैं... तभी जीवन पूर्णता को प्राप्त करता है।"