"किस्मत वाले हैं हम... बाबा ने हमें बुलाया है..." जब आप हल्द्वानी से भवाली की तरफ़ बढ़ेंगे ना... तो भवाली से लगभग 8 किलोमीटर आगे पहाड़ों के बीच एक ऐसा धाम मिलेगा, जहाँ सिर्फ़ रास्ते नहीं... किस्मतें भी पहुँचती हैं। ये है बाबा नीम करौली महाराज का पावन कैंची धाम। कहते हैं कि यहाँ कोई अपनी मर्ज़ी से नहीं आता... बाबा जिसे बुलाते हैं, वही उनके दरबार तक पहुँच पाता है। और इस बार... 15 जून को बाबा ने आपको बुलाया है। हो सकता है उस दिन भवाली से कैंची धाम तक का रास्ता थोड़ा पैदल चलना पड़े... भीड़ भी ज़्यादा हो... लेकिन जैसे-जैसे "बाबा नीम करौली महाराज की जय" के जयकारे गूंजेंगे, वैसे-वैसे सारी थकान कहीं खो जाएगी। रास्ते में लगने वाले भंडारों का स्वाद, भक्तों की श्रद्धा, और पहाड़ों में गूंजती भक्ति की आवाज़... इस यात्रा को यादगार बना देगी। और जब बाबा के दर्शन हो जाएंगे... तो प्रसाद के रूप में मिलने वाले मालपुए उस अनुभव को और भी मीठा बना देंगे। आज मंदिर सजा हुआ है... भक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ा है... हर तरफ़ भक्ति, विश्वास और प्रेम का माहौल है। और मन बार-बार बस यही कहता है... "किस्मत वाले हैं हम... बाबा ने हमें बुलाया है।"