Shreyash

Shreyash

@kihiba2738
0Usos
0Comparte
0Me gusta
0Guardado por

“गाँव छोटा था… पर कहानी बड़ी। एक लकड़हारा था—रामू। गरीब था, मगर उसके इरादे… बहुत अमीर थे।” हर सुबह वह जंगल जाता, कुल्हाड़ी चलाता, और पसीने की हर बूंद से अपने घर का चूल्हा जलाता। एक दिन… किस्मत ने करवट ली। नदी किनारे लकड़ी काटते-काटते उसकी कुल्हाड़ी… छपाक!… पानी में गिर गई। रामू की आँखों में चिंता थी, पर दिल में सच्चाई। वह बोला, “हे भगवान, अब मेरा क्या होगा?” तभी नदी से एक तेज़ रोशनी उठी… और एक देवता प्रकट हुए। उन्होंने सोने की कुल्हाड़ी दिखाई— “रामू, क्या ये तुम्हारी है?” रामू ने गहरी साँस ली… और कहा, “नहीं महाराज… मेरी कुल्हाड़ी तो लोहे की थी। मैं झूठ बोलकर अमीर नहीं बनना चाहता।” देवता मुस्कुराए। चाँदी की कुल्हाड़ी दिखाई— रामू फिर बोला, “नहीं… वो भी मेरी नहीं।” आख़िरकार, देवता ने उसकी पुरानी लोहे की कुल्हाड़ी निकाली। रामू की आँखों में चमक आ गई— “हाँ! यही मेरी है… यही मेरी सच्ची कमाई है।” देवता खुश हुए। बोले— “रामू, आज तुमने दुनिया को याद दिलाया है… कि ईमानदारी… सबसे बड़ी ताकत है।” और उन्होंने तीनों कुल्हाड़ियाँ उसे दे दीं। (थोड़ा ठहराव… फिर भारी आवाज़) “याद रखिए… इंसान अमीर पैसे से नहीं… अपने सच और ईमान से बनता है।” बोध: सच्चाई और ईमानदारी… देर से सही, लेकिन जीत हमेशा उसी की होती है।

urMasculinoMediana EdadNarraciónProfundoCálidoSerioAutoritarioMedidoHindi
Público
Muestras
Aún no hay muestras de audio