ये... या... अह, अह... छठी क्लास में छूटा स्कूल हाथों से किताबें गिर गईं मासूम सी उस उम्र में जिम्मेदारियां सिर पे घिर गईं मां-बाप पे था कर्जा हर तरफ बस तन्हाई थी टेंशन में मेरा दिमाग खराब हर रात एक रुसवाई थी बचपन कहीं खो गया मैं काम की तलाश में निकल पड़ा छोटा था पर हालातों से मैं हर एक मोड़ पे लड़ पड़ा [Pre-Chorus] ये दुनिया हँसती है जब वक्त बुरा होता है पर जो लड़ता है रातों से वही सवेरा खोता है [Chorus] ये दुनिया हँसती है जब वक्त बुरा होता है पर जो लड़ता है रातों से वही सवेरा खोता है मेरी मजबूरी का मजाक जिसने-जिसने उड़ाया है अब देख मेरा हर कदम मैंने खुद को बढ़ाया है [Verse 2] दिन-रात एक किया पसीना बहाया काम तमाम किया जब हक के पैसे मांगे तो उन्होंने मुझे बदनाम किया मार के, बजा के खाली हाथ मुझे भेज दिया उस टूटे हुए दिल ने फिर पन्नों पे अपना दर्द लिख दिया शुरू किया मैंने लिखना जब कोई ना था मेरे साथ में कलम बन गई ताकत एक नया ख्वाब था हाथ में [Chorus] ये दुनिया हँसती है जब वक्त बुरा होता है पर जो लड़ता है रातों से वही सवेरा खोता है मेरी मजबूरी का मजाक जिसने-जिसने उड़ाया है अब देख मेरा हर कदम मैंने खुद को बढ़ाया है [Bridge] जब पहला गाना बनाया तो अपनों ने ही पीठ दिखाई चाचा-ताऊ हँसने लगे कैसी ये मजबूरी आई जो मजाक उड़ाते थे आज वो पास आना चाहते हैं देख के मेरा बढ़ता कदम अब साथ निभाना चाहते हैं पर अच्छे वक्त में जो आए मैं उनका स्वागत करता हूँ बीते कल को भूलकर मैं अब सिर्फ आगे बढ़ता हूँ [Outro] हाँ, छूटा था स्कूल मेरा पर जिंदगी ने बहुत कुछ सिखा दिया अब ना रुकेंगे ये कदम मैंने खुद को साबित कर दिखा दिया