श्रीकृष्ण कहते हैं— “हे पार्थ… जिस चीज़ को तुम बदल नहीं सकते, उसके लिए चिंता करके अपने आज को मत खोओ। जीवन में सुख आएगा, दुख भी आएगा… सम्मान मिलेगा, अपमान भी होगा… लेकिन याद रखना— समय कभी एक जैसा नहीं रहता। तुम्हारा अधिकार केवल अपने कर्म पर है। इसलिए परिणाम की चिंता छोड़कर, अपने कर्म को पूरी ईमानदारी से करते रहो। जो बीत गया, उसे बार-बार सोचकर दुखी मत हो। जो आने वाला है, उसके डर में आज को मत गंवाओ। क्योंकि जीवन का सबसे बड़ा सत्य यही है— जो तुम्हारे पास आज है, वही तुम्हारा वास्तविक जीवन है। अपने मन को शांत रखो, अपने कर्म को सच्चा रखो, और ईश्वर पर विश्वास रखो। जब मनुष्य अपना अहंकार छोड़कर कर्म करता है, तभी उसके भीतर शांति जन्म लेती है। इसलिए उठो… कर्तव्य करो… और परिणाम की चिंता मुझ पर छोड़ दो।”