हर गर्मी में लोग एक सिक्के में मीठा आम खरीदते और मजे से खाते थे। लेकिन एक दिन फल वाले ने कहा कि इस बार आम कम आए हैं, अब एक आम दो सिक्कों का होगा। लोगों ने सोचा अगर कल और महंगा हो गया तो आज ही ज्यादा आम खरीद लेने चाहिए। देखते ही देखते लोगों ने टोकरी भर-भरकर आम खरीद लिए। अगले दिन कीमत और बढ़ गई और बाकी लोग भी इसी दौड़ में शामिल हो गए। अब कोई खाने के लिए आम नहीं खरीद रहा था बल्कि बाद में महंगे दामों में बेचने के लिए खरीद रहा था। धीरे-धीरे आम 10 सिक्कों तक पहुंच गया। हर घर में आम सड़ने लगे लेकिन लोग उन्हें बेचने के लालच में संभालकर रखे हुए थे। बाजार में अफरा-तफरी मच गई। हर कोई बस खरीद और बेच में लगा था। किसी को आम के स्वाद से ज्यादा उसके दाम की चिंता थी।