Daniel
NLR NRALE에 의해एक जल परी जो अपनी रहस्यमयी आवाज से लोगो को समुद्र में बुलाकर उसकी आत्मा को खा जाती है । कहानी को जानने के लिए अंत तक देखे।
कुछ दिनों से, हर रात, जब पूरा गाँव सो जाता था, समुद्र से एक अजीब लेकिन अद्भुत संगीत सुनाई देता था। वह संगीत ऐसा था, जैसे खुद चाँद और तारे उसे गा रहे हों—मधुर, मोहक, और रहस्यमय।
पहले तो रघु ने इसे नज़र अंदाज किया, लेकिन एक दिन जब गाँव के सभी मछुआरे अपनी नाव समुद्र किनारे पर खड़ी करके घर जा चुके थे, लेकिन रघु नाम का मछुआरा अभी भी समुद्र की ओर देख रहा था।
समुद्र की लहरें हल्की-हल्की किनारे से टकरा रही थीं, अंधेरी रात थी, और दूर-दूर तक बस चांद की रौशनी फैली हुई थी, आज, जब रघु अकेला समुद्र किनारे बैठा था, वह रहस्यमई आवाज़ फिर से गूंजने लगी। उसने अपनी आँखें बंद कर लीं, और खुद को इस धुन में डूबने दिया, अचानक, उसे ऐसा लगा जैसे कोई उसे बुला रहा हो।
"रघु…"
उसने झट से आँखें खोलीं । तो देखा कि उसके आस पास कोई नहीं था, बस शांत समुद्र और दूर तक फैली रात। लेकिन आवाज़ अब और भी साफ सुनाई देने लगी थी।
रघु इस सुरीली और रहस्यमई आवाज सुनकर अब खुद को रोक नहीं पाया। वह अपनी नाव लेकर समुद्र की ओर निकल गया। आवाज़ उसे किसी अनजाने स्थान की ओर बुला रही थी, रघु भी उस रहस्यमई आवाज का पीछा करते करते जैसे ही वह गहरे पानी में पहुँचा, धुन और तेज़ हो गई।
तभी, उसे पानी में एक छाया हिलती हुई दिखाई दी। उसकी दिल की धड़कन तेज़ हो गई। और घबराते हुए बोला क्या वह कोई मछली थी? या कुछ और?
रघु ने अपनी लालटेन उठाई और पानी में झाँका। तभी, उसने एक बहुत ही खूबसूरत सी जल परी को देखा।
वह सबसे सुंदर चीज़ थी जो रघु ने कभी अपने जीवन में देखी थी। उस जल परी की त्वचा चाँदी जैसी चमक रही थी, और उसकी आँखें गहरी नीली थीं, जैसे समुद्र की गहराई में बसी कोई दुनिया हो। उसके बाल पानी में लहरों की तरह बह रहे थे, और उसके होंठ हौले-हौले हिल रहे थे—वही मंत्रमुग्ध कर देने वाला गीत गाते हुए।
रघु जैसे ही आगे बढ़ा, जलपरी मुस्कुराई। उसकी मुस्कान मोहक थी,
"तुम कौन हो?" रघु ने धीरे से पूछा।
जलपरी ने गाना बंद कर दिया और धीरे से जवाब दिया, "मैं नेरी हूँ।" उसकी आवाज़ भी वैसी ही थी, जैसी धुन—मीठी, रहस्यमयी, और सम्मोहक।
"तुम यहाँ क्या कर रहे हो?" नेरी ने पूछा।
"मैं… तुम्हारी आवाज़ के पीछे आया था।" रघु ने जवाब दिया।
नेरी ने फिर से मुस्कुराया और कहा "अच्छा किया।"
रघु अब हर रात समुद्र में नेरी से मिलने जाने लगा। हर बार जब वह आता, नेरी उसे और गाने सुनाती, और रघु धीरे-धीरे उसके जादू में डूबता चला गया।
लेकिन उसे यह नहीं पता था कि उसका शरीर कमजोर होने लगा है। उसकी आँखों के नीचे काले घेरे पड़ने लगे थे, और वह पहले से अधिक थका हुआ महसूस करने लगा था। गाँव के लोगों ने उससे पूछा कि क्या हुआ, लेकिन उसने कुछ नहीं बताया।
एक रात, जब रघु फिर से नेरी से मिलने पहुँचा, तो उसने कुछ अलग महसूस किया। उसकी धुन आज और भी ज़्यादा सम्मोहक थी। उसकी आँखें और भी चमक रही थीं।
रघु को लगा जैसे वह खुद को खो रहा है।
"रघु, तुम थके हुए लग रहे हो," नेरी ने कहा।
"हाँ, शायद," उसने धीरे से जवाब दिया।
नेरी ने कहा, अपना हाथ बढ़ाते हुए नेरी ने कहा आओ, मेरे पास आओ,
रघु अनजाने में उसकी ओर झुकने लगा। लेकिन जैसे ही उसका हाथ नेरी के हाथ से छूने वाला था, उसे अचानक कुछ याद आ गया—उसकी माँ ने बचपन में एक कहानी सुनाई थी, "समुद्र की चुड़ैलें इंसानों को अपनी धुन में फँसा कर उन्हें पानी में खींच लेती हैं और उनका जीवन शक्ति चुरा लेती हैं।
रघु ने पीछे हटने की कोशिश की, लेकिन बहुत देर हो चुकी थी। नेरी की मुस्कान अब पहले जैसी मासूम नहीं थी। उसके होंठों से हल्की हँसी निकली, लेकिन उसकी आँखों में एक अजीब चमक थी, जैसे वह अपने शिकार को जाल में फसाने के बाद खुश हो।
अचानक, नेरी का चेहरा बदलने लगा। उसकी त्वचा की चमक फीकी पड़ गई, और उसकी आँखें काली हो गईं। उसके दाँत नुकीले और लंबे हो गए, और उसके हाथों की उंगलियाँ पंजों में बदल गईं।
रघु ने डर के मारे चीखने की कोशिश की, लेकिन आवाज़ नहीं निकली। नेरी ने अपनी आवाज़ को और तेज़ कर दिया, और रघु की आँखें धीरे-धीरे बंद होने लगीं।
वह नाव से नीचे गिरने वाला था कि तभी…
रघु, रघु
उसने किसी को पुकारते सुना।
जो गाँव का एक और मछुआरा, रामू, अपनी नाव लेकर वहाँ आ रहा था, और जलपरी ने गुस्से में एक भयंकर चीख मारी।
रघु आवाज सुनकर जैसे ही होश में आया, उसने पूरी ताकत लगाकर खुद को नाव में खींचा और रामू की ओर बढ़ा। नेरी अब और ज़्यादा डरावनी लग रही थी, और उसकी आँखों में गहरी नफरत थी।
तुम बच नहीं सकते, रघु नेरी की आवाज़ अब डरावनी और एक दानवी चीख थी।
रामू ने रघु को पकड़कर नाव में खींच लिया और नाव में रखे लालटेन को जलपरी के ऊपर फेक तेजी से वहा से भाग निकले।
अगले दिन, रघु ने अपनी हालत गाव वालों को बताई। गाव के बुजुर्गों ने कहा कि यह marasi जलपरी" थी, जो अपनी धुन से इंसानों को वश में करके उनकी आत्मा चुरा लेती थी।
रघु को यह सब एक बुरा सपना लग रहा था, लेकिन उसके शरीर की कमजोरी और उसकी रातों की यादें उसे बता रही थीं कि यह हकीकत थी।
उस रात, गाव वालों ने समुद्र में आग के गोले फेंककर जलपरी को भगाने की कोशिश की फिर किसी ने नेरी को दोबारा नहीं देखा।
रघु आज भी जब समुद्र के किनारे जाता है, तो उसे कभी-कभी लगता कि लहरों के साथ कोई हल्की हल्की धुन आ रही है।
क्या नेरी सच में चली गई थी? या वह किसी और शिकार की तलाश में थी?
यदि हा तो कौन होगा नेरी का अगला शिकार ?