किसी को समझाने के लिए खुद को इतना मत खोना। जो सच में तुम्हारी परवाह करता है न, वो बिना कहे ही तुम्हें समझ लेता है। कभी-कभी हम इतनी कोशिश करते हैं कि लोग हमें समझ लें, कि खुद को ही खोने लगते हैं। पर सच ये है, समझ explanation से नहीं, नियत से आती है। ज़िंदगी का एक गहरा लेसन है: जहाँ समझने की चाहत होती है, वहाँ लफ्ज़ जरूरी नहीं होते। और जहाँ चाहत ही नहीं होती, वहाँ हज़ार बातें भी काफी नहीं होतीं। इसलिए खुद को हर किसी के सामने प्रूफ मत करो। अपनी एनर्जी बचाओ, और उन लोगों के ऊपर खर्च करो जो तुम्हे मन से अपना मानते है। क्योंकि जो तुम्हें समझता है, वो कभी तुम्हें खोना नहीं चाहेगा। और जो समझना ही नहीं चाहता, उसे समझना तुम्हारी लिए वेयर्थ है।