प्रेरक आवाज़
Rohit kumar Satyaによるक्या आप भविष्य को लेकर चिंतित हैं? क्या आपके मन में बार-बार यह डर आता है कि आगे क्या होगा? नौकरी मिलेगी या नहीं, रिश्ते बचेंगे या नहीं, सफलता मिलेगी या नहीं?
आज मैं आपको एक ऐसी बात बताने जा रहा हूँ जो आपके मन का बोझ हल्का कर सकती है। ओशो कहते हैं, "जीवन पर भरोसा करो। जो भी होगा, वह तुम्हारे विकास के लिए होगा।" इसलिए आज का संदेश है—"घबराओ मत, जो होगा अच्छा होगा।"
घबराहट का जन्म वर्तमान में नहीं होता। घबराहट हमेशा भविष्य से पैदा होती है। ध्यान से देखिए, अभी इस क्षण क्या कोई समस्या है? लेकिन मन भविष्य की कहानियाँ बनाता रहता है। अगर ऐसा हो गया तो? अगर मैं हार गया तो? अगर लोग मुझे छोड़ गए तो? मन हजारों कल्पनाएँ बनाता है और उन्हीं कल्पनाओं से डर पैदा होता है। सच्चाई यह है कि भविष्य अभी आया ही नहीं है। आप उस चीज़ से डर रहे हैं जो केवल आपके मन में है। ओशो कहते हैं, "जिस क्षण तुम वर्तमान में जीना सीख जाते हो, उसी क्षण भय समाप्त होने लगता है।"
हम अक्सर मान लेते हैं कि जीवन हमारे खिलाफ है। जब कोई योजना टूट जाती है, जब कोई व्यक्ति छोड़कर चला जाता है, जब कोई अवसर हाथ से निकल जाता है, तो हमें लगता है कि सब कुछ गलत हो गया। लेकिन पीछे मुड़कर देखिए। कई बार जो चीज़ उस समय बुरी लग रही थी, वही बाद में सबसे बड़ा वरदान साबित हुई। जिस नौकरी के लिए आप रो रहे थे, शायद वह आपके लिए सही नहीं थी। जिस रिश्ते के टूटने से आप टूट गए थे, शायद उसी ने आपको मजबूत बनाया। जीवन का अपना एक रहस्य है। वह हमेशा आपको वहीं ले जा रहा है जहाँ आपका विकास हो सके। इसलिए ओशो कहते हैं, "अस्तित्व पर भरोसा रखो। अस्तित्व कभी गलती नहीं करता।"
विश्वास का अर्थ यह नहीं कि सब कुछ आपकी इच्छा के अनुसार होगा। विश्वास का अर्थ है—जो भी होगा, मैं उसे स्वीकार करूँगा। अगर सफलता मिली, अच्छा। अगर असफलता मिली, उससे सीखूँगा। अगर रास्ता आसान हुआ, अच्छा। अगर कठिन हुआ, तब भी आगे बढ़ूँगा। विश्वास का मतलब है जीवन से लड़ना बंद करना। जब आप नदी के साथ बहते हैं तो यात्रा सरल हो जाती है। लेकिन जब आप धारा के खिलाफ तैरते हैं, तब थकान, तनाव और दुख पैदा होते हैं। ओशो कहते हैं, "समर्पण हार नहीं है, समर्पण जीवन के साथ एक हो जाना है।"
अगली बार जब डर आए, तो तुरंत भविष्य के बारे में सोचना बंद करें। गहरी साँस लें। अपने आसपास देखें। खुद से पूछें—"क्या इस क्षण मैं सुरक्षित हूँ?" अधिकतर समय उत्तर होगा—हाँ। फिर अपने मन से कहें, "मैं जीवन पर भरोसा करता हूँ। जो होगा, देखा जाएगा। और जो होगा, वह मुझे कुछ नया सिखाएगा।" धीरे-धीरे आपका डर पिघलने लगेगा। क्योंकि डर अंधेरे में जीता है, और जागरूकता की रोशनी उसे समाप्त कर देती है।
दोस्तों, याद रखिए—जीवन कोई समस्या नहीं है जिसे हल करना है। जीवन एक रहस्य है जिसे जीना है। इसलिए भविष्य की चिंता छोड़िए। आज में जीना शुरू कीजिए। विश्वास रखिए कि अस्तित्व आपके साथ है। और जब भी मन घबराए, यह वाक्य याद कीजिए—
"घबराओ मत, जो होगा अच्छा होगा। क्योंकि जीवन हमेशा तुम्हें वहाँ ले जाता है जहाँ तुम्हारी आत्मा का विकास हो सके।"