Friendly Narrator
por Ansh Soniटाइम टेबल बनाना ना एक कला है, एक आर्ट है। अगर आपको सही तरीके से टाइम टेबल बनाना आ गया ना तो क्लास नाइंथ और क्लास 10th के अंदर तुम्हारा ये जो ड्रीम स्कोर है ना जो कि है 95% 98% वो तुम ईजीली अचीव कर सकते हो। सो हाय एवरीवन मैं हूं आप सभी का अपना प्रशांत भैया और एक वीडियो मैं तुम्हारे लिए लेकर आ गया हूं जो कि है टाइम टेबल के ऊपर। देखो मैं जितने भी टॉपर से बात करता हूं ना जो कि 95 98% अचीव करते हैं। हर एक टॉपर ये बोलता है हमें सही तरीके से टाइम टेबल बनाना आ गया था। जिस वजह से हमने उस स्कोर को अचीव करा। अब पता है एक बहुत बड़ी रियलिटी है कि टाइम टेबल बनाने की कोशिश ना हर एक स्टूडेंट करता है। अच्छा मुझे सच-सच बताना क्या ऐसा कोई टाइम टेबल तुमने भी कभी ना कभी अपने जीवन में बनाया था कि 6:00 बजे उठेंगे। 6:00 बजे उठ के ऐसे स्कूल भूल जाएंगे। फिर स्कूल से वापस आएंगे। थोड़ा रेस्ट लेंगे। फिर ट्यूशन जाने से पहले एक घंटा पढ़ाई करेंगे। फिर ट्यूशन से जब तुम वापस आ जाओगे तो एक घंटा पढ़ाई करोगे। होमवर्क करोगे और रात को सो जाओगे। अब जब तुमने ये टाइम टेबल बनाया होगा तुम बहुत ज्यादा मोटिवेटेड होगे और तुम्हारे मन में चल रहा होगा कि अब तो ना इस टाइम टेबल को फॉलो करेंगे। तुमने कुछ दिन इस टाइम टेबल को फॉलो करा भी होगा। लेकिन हुआ क्या होगा? कुछ दिनों बाद तुम्हारे अंदर की जो मोटिवेशन है वो खत्म हो गई होगी। और ये जो टाइम टेबल है ये सिर्फ तुम्हारे पेपर के ऊपर होगा और तुम इसको बिल्कुल फॉलो नहीं कर पा रहेगे और फिर तुमने इसको फॉलो करना भी बंद कर दिया होगा। मुझे सच सच बताओ क्या कमेंट सेक्शन में यस लिखना अगर तुम्हारे साथ ऐसा हुआ है। ये जो पूरी मैंने आपको स्टोरी बताई क्या तुमने भी कभी ऐसा फील करा है? कमेंट्स में यस लिखना और अगर ऐसा नहीं फील करा तो कमेंट में नो भी जरूर लिखना। बट मुझे पता है 90% बच्चों ने ऐसा कभी ना कभी तो जरूर करा होगा। टाइम टेबल बनाया होगा और उनसे फॉलो नहीं हो पाया होगा। अब पता है ये क्यों हुआ? क्योंकि तुमने ना इस मेथड से टाइम टेबल बनाया। ये जो मेथड है ये एकदम बकवास मेथड है टाइम टेबल बनाने का। ऐसे टाइम टेबल बनता ही नहीं है। फिर भैया कैसे बनता है टाइम टेबल? पांच स्टेप हैं। पांच स्टेप एक-एक करके सारे स्टेप बता रहा हूं। एक पेपर पेन लेकर आ जाओ। उस स्टेप के हिसाब से अब आपको अपना डेली का टाइम टेबल बनाना है। बहुत इजी स्टेप्स हैं। ध्यान से सुनते चलना। सबसे पहला स्टेप नंबर वन। तुम्हें ये पता होना चाहिए कि तुम दिन में अच्छा पढ़ते हो यानी मॉर्निंग में अच्छा पढ़ते हो या फिर तुम रात को अच्छा पढ़ते हो। अब बहुत सारे स्टूडेंट हो सकते हैं जो कि रात को अच्छा पढ़ते हैं। मैं भी अपने टाइम पे रात को अच्छा पढ़ता था। बहुत सारे स्टूडेंट होंगे जो कि सुबह अर्ली मॉर्निंग में अच्छा पढ़ते हैं। भैया हमें तो यही नहीं पता कि हम सुबह अच्छा पढ़ते हैं रात को। तो क्या करो? एक दिन लेट नाइट स्टडी करो और एक दिन अर्ली मॉर्निंग स्टडी करो। है ना? उससे तुम्हें आईडिया लग जाएगा कि किस समय में तुम्हारी प्रोडक्टिविटी यानी तुम्हारी फोकस पावर ज्यादा है। जैसे ही तुम्हें पता चल जाए तो उसके हिसाब से मैं तुम्हें एक टाइम टेबल बता रहा हूं। अगर तुम्हें दिन में पढ़ना अच्छा लगता है। यानी एकदम तुम अर्ली मॉर्निंग स्कूल जाने से पहले पढ़ना चाहते हो तो तुम्हारा रूटीन क्या होना चाहिए? तुम्हें 9 10:00 बजे सो जाना है। है ना? इससे लेट तो तुम्हें करना ही नहीं है। फिर तुम्हें कब उठना है? तुम्हें 5:00 बजे उठना है। तो तुम्हारी 7 घंटे की नींद भी पूरी हो जाएगी। ठीक है? तुम्हें 5:00 बजे उठना है। अब स्कूल तुम्हें 6:00 बजे तैयार होने जाना होता होगा स्कूल के लिए। तो तुम 5:00 बजे से 6:00 बजे यानी 1 घंटा मांग रहा हूं। अर्ली मॉर्निंग में 1 घंटा पढ़ाई करोगे। क्या करोगे? पढ़ाई करोगे। सेल्फ स्टडी करोगे। अपने वीक टॉपिक्स पे फोकस करोगे। वीक टॉपिक्स मान लो मैथ्स तुम्हारी वीक है, साइंस तुम्हारी वीक है। तुम्हें उस पे फोकस करना होगा। यानी तुम्हें 1 घंटा मॉर्निंग में अर्ली मॉर्निंग में सेल्फ स्टडी करनी होगी और एक घंटा तुम शाम को निकाल सकते हो। जब भी तुम ऑनलाइन क्लासेस या ट्यूशन के बाद घर पे होते हो ना उस 1 घंटे को तुम निकाल सकते हो। तो बेसिकली तुमने 2 घंटे की पढ़ाई कर ली और 2 घंटे की पढ़ाई मोर देन इनफ है। सच्ची मैं बता रहा हूं। अगर तुम नाइन 10थ में हो ना 2 घंटे अगर तुम डेली सेल्फ स्टडी कर रहे हो ना मोर देन इनफ है। काम हो जाएगा इससे। अच्छा अब उस बच्चे की बात करते हैं जो कि लेट नाइट पढ़ना प्रेफर करता है। तो तुम्हें जो नींद लेनी है ना तुम्हें नींद लेनी है 12:00 बजे यानी रात के जो 12:00 बजे हैं तब तुम्हें सोने जाना है। ठीक है? अब जो 10 से 12 का ये जो स्लॉट है ना इस 2 घंटे में तुम्हें पढ़ाई करनी है। क्या करनी है बेटा? पढ़ाई करनी है। ठीक है? अब ये मत बोलना भैया इस समय तो हमें नींद आती है। अगर तुम रात को अच्छे से पढ़ पाते हो ना तो बेस्ट टाइम तुम्हारे लिए 10 से 12 का होता है। पता है क्यों? इस समय पे शोरशराबा नहीं होता कहीं पे भी। तुम आराम से एक जगह पे बैठ के शांति से पढ़ सकते हो। इस वजह से ये वाले जो 2 घंटे हैं ये तुम्हारे लिए बेस्ट होंगे। है ना? तुम्हें शाम को नहीं पढ़ना। तुम्हें सुबह जल्दी नहीं उठना। तुम आराम से 6:00 बजे 7:00 बजे जब तुम्हें स्कूल जाना है उससे आधे 1 घंटे पहले उठ के जा सकते हो। लेकिन ये वाला जो टाइम है इसमें तुम पढ़ो। अच्छे से पढ़ो। सेल्फ स्टडी करो। तुम्हारे लिए भी 2 घंटे मोर देन इनफ है। 2 घंटे 2 घंटे। ये जो बच्चे पूछते हैं ना भैया कितने घंटे पढ़ना होगा? अरे यार अगर तुम हर रोज 2 घंटे पढ़ रहे हो। यह बहुत बड़ी बात है। इससे काम चल जाएगा। पर सेल्फ स्टडी बोल रहा हूं मैं 2 घंटे। ठीक है? इतना क्लियर हो गया। ये था हमारा स्टेप नंबर वन। स्टेप नंबर टू क्या है? स्टेप नंबर टू है सेट टारगेट्स डेली। देखो टाइम टेबल ना ऐसे नहीं बनता कि 9:00 बजे, 10:00 बजे, 11:00 बजे, 12:00 बजे। टाइम टेबल का मतलब होता है जब भी तुम रात को सोने जा रहे हो। सोने जाने से 5 मिनट पहले, कितने मिनट पहले? 5 मिनट पहले ना एक पेपर उठाओ। और उस पेपर पे वो सारे टारगेट्स लिख लो जो कि तुम्हें कल अचीव करने हैं। मान लो मैंने ये पेपर उठाया। इसमें मैंने टारगेट्स लिखना स्टार्ट करे कि मैथ्स का ये जो चैप्टर नंबर वन है ना मुझे ये पढ़ना है कल साइंस का चैप्टर नंबर टू मुझे पढ़ना है। एक होमवर्क मुझे करना है। मैंने टारगेट्स लिख लिए। अब क्या होगा? अगले दिन इन सारे टारगेट्स को मुझे पूरा करना है। और जब इन सारे टारगेट्स को मैं पूरा करने लगूंगा ना तो मैं इन पैसे कट करूंगा इनको। एक टारगेट कंप्लीट, सेकंड टारगेट कंप्लीट, थर्ड टारगेट कंप्लीट। इससे ना डेली मोटिवेशन आएगी, एनर्जी आएगी रोज मेहनत करने की, रोज काम करने की। वेरीेंट मेथड। क्या करना है? टारगेट बनाने पड़ेंगे अब से हर रोज टारगेट बनाओ हर रोज है ना मुझे पता है दो-तीन दिन तो तुम बना लोगे चौथे दिन तुम्हें आलस आने लगेगा तुम प्रोक्रास्टिनेट करने लगोगे तुम बोलने लगोगे अरे आज टाइम टेबल नहीं बनाते आज टारगेट नहीं बनाते बट तुम्हें ऐसा बिल्कुल नहीं करना है हर रोज टारगेट बनाने पड़ेंगे रात को सोने से पहले और अगले दिन उन टारगेट्स को फॉलो करना है मैं बोल रहा हूं कि शुरू में टारगेट्स पूरे नहीं हो पाएंगे सिर्फ 80% टारगेट पूरे होंगे 90% टारगेट पूरे होंगे बट तुम्हें हार नहीं माननी तुम्हें लगे रहना है अगर तुम लगे है 21 दिन के अंदर तुम्हें रिजल्ट दिखने लगेगा। ये मेरी गारंटी है। ठीक है? ये था स्टेप नंबर टू। अब आते हैं स्टेप नंबर थ्री की तरफ जो कि है वन आवर प्रोडक्टिविटी रूल। देखो जैसा मैंने आपको शुरू में बताया अगर आप सुबह पढ़ते हो तो वो जो शुरू का 1 घंटा होता है और अगर तुम रात को पढ़ते हो तो जो रात का एक घंटा होता है वो तुम्हारे लिए बहुत इंपॉर्टेंट है। और उसी को हम बोलते हैं वन ऑवर प्रोडक्टिविटी रूल। अब ये रूल क्या बोलता है? ये रूल एक सिंपल सी लाइन बोलता है कि अगर एक स्टूडेंट दिन में 1 घंटा ढंग से पढ़ लेता है। ढंग से मेरा मतलब है कि उसका फोकस एकदम 1101% है। उसका फोकस Instagram रील पे नहीं जा रहा। YouTube श पे नहीं जा रहा। उसका फोकस पढ़ाई पे है। अगर 1 घंटा भी एक बच्चा ढंग से पढ़ लेता है ना तो उस 1 घंटे के अंदर वो 3 घंटे की पढ़ाई कर लेता है। ये रियलिटी है। ये साइंटिफिक स्टडी है। इसलिए मैं बोल रहा हूं ये जो आपका दिन का 1 घंटा है चाहे वो सुबह का 1 घंटा हो चाहे वो शाम का 1 घंटा हो। उसमें ना तुम्हारी प्रोडक्टिविटी 1101% होनी चाहिए। मोबाइल, फोन सब कुछ साइड में रख दो। सिर्फ फोकस तुम्हारा 1 घंटे पढ़ाई पे होना चाहिए। अगर तुमने ये वन ऑवर प्रोडक्टिविटी रूल को फॉलो करा ना तो ये जो तुम्हारे डेली के टारगेट्स हैं ना ये टारगेट्स अचीव हो जाएंगे। बिल्कुल हो जाएंगे। मैं गारंटी से बता रहा हूं। तो इसलिए जो वन ऑवर प्रोडक्टिविटी रूल है एक घंटा तुम्हारा बहुत स्ट्रांग होना चाहिए। भैया वो जो दूसरा घंटा है उसमें चाहे तुम होमवर्क कर रहे हो। कुछ आसान चीजें पढ़ रहे हो। लेकिन ये जो एक घंटा है ना इसमें अपने वीक टॉपिक्स को तुम्हें स्ट्रांग बनाना होगा। याद रखो। ठीक है? ये स्टेप नंबर थ्री आ गया। अब बढ़ते हैं स्टेप नंबर फोर की तरफ। स्टेप नंबर फोर और सबसे इंपॉर्टेंट रूल टॉपर्स माइंडसेट। भैया ये टॉपर माइंडसेट क्या है? देखो यार मैं एक फर्क बता देता हूं। एक टॉपर और एक एवरेज बच्चे में पता है क्या फर्क होता है? ये दोनों ही बच्चे अगर किसी दिन अपना पूरा दिन खराब कर देते हैं, वेस्ट कर देते हैं। तो पता है एक एवरेज बच्चा ये बोलता है कि यार आज तो पूरा दिन खराब हो गया। चलो अब कल से पढ़ेंगे। ठीक है? और एक टॉपर बच्चा पता है क्या बोलता है? यार अभी ना दिन तो खराब हो गया लेकिन आधा घंटा बचा है। 30 मिनट्स बचे हैं। इस 30 मिनट्स में भी मैं पढ़ाई कर लेता हूं या कर लेती हूं। ये फर्क है। कुछ फर्क नहीं है भाई। बस इतना सा फर्क है कि टॉपर ये देखता है कि अगर एक घंटा भी है, आधा घंटा भी है, 15 मिनट भी है तो उसको भी वो यूटिलाइज करता है यानी काम पे लगाता है। लेकिन एक एवरेज बच्चा ये सोचता है कि यार पूरा दिन खराब कर दिया। अब क्या ही फायदा? आधे घंटे में मैं क्या ही पढ़ लूंगा और वो सो जाता है। ये फर्क है। अगर तुम्हारे पास 1 घंटा है, आधा घंटा है, 2 घंटा है, 15 मिनट है, फर्क नहीं पड़ता। वो जो तुमने खुद से कमिटमेंट करी है ना इस क्लास के अंदर टॉपर बनने की जो तुम्हारी कमिटमेंट है ना कि हम तो बहुत अच्छे मार्क्स लाएंगे। वो कमिटमेंट तभी पूरी हो पाएगी जब तुम्हें हर रोज टॉपर माइंडसेट को फॉलो करना होगा। जब तुम हर रोज खुद से बोलोगे कि ठीक है आधा घंटा, आधा घंटा पढ़ लेते हैं, एक घंटा पढ़ लेते हैं, 2 घंटा पढ़ लेते हैं। बट पढ़ना पड़ेगा। कंसिस्टेंसी इज दी की। याद रखना इस बात को। यह क्या है? स्टेप नंबर फोर। फाइनली आ जाते हैं स्टेप नंबर फाइव की तरफ जो कि है होमवर्क का टाइम। बहुत सारे बच्चे बोलते हैं भैया टाइम टेबल में नोट्स बनाने हैं। होमवर्क करना है, स्कूल का काम करना है, टाइम ही नहीं है। मैंने कहा टाइम है। पता है एक सिंपल सी स्ट्रेटजी बताता हूं। मैं क्या करता था अपने स्कूल टाइम पे जितना भी स्कूल का होमवर्क होता है ना जिसमें दिमाग तो लगाना नहीं होता। तुम्हें सामने वाले की कॉपी में से बस लिखना होता है। वो सारा होमवर्क ना मैं ट्राई करता था मैं स्कूल में ही खत्म कर लूं। स्कूल में कभी कबभार फ्री पीरियड्स आते थे। तुमने ध्यान दिया होगा। तुम्हारे भी आते हैं। है ना? तो उन फ्री पीरियड के अंदर मैं क्या करता था? जितने भी होमवर्क हैं, जो नोट्स वोट्स बनाने होते थे, सारे के सारे तब कर लेता था ताकि जब मैं घर जाऊं, तो मेरा टाइम खराब होने से बच जाए। ठीक है? मान लेते हैं अगर तुम्हें स्कूल में फ्री पीरियड नहीं मिल रहा, तुम्हारा वहां पे नहीं हो पा रहा तो तुम क्या कर सकते हो? तुम्हें सबसे पहले प्रोक्रास्टिनेशन बंद करना होगा। यानी चीजों को टालना बंद करना होगा। क्योंकि ना हम नोट्स को टालते बहुत हैं कि आज नहीं, कल बनाएंगे, परसों बनाएंगे, तरसों बनाएंगे। ये नहीं करना। तुम्हें क्या करना है? या तो स्कूल में करो और अगर स्कूल में नहीं कर पा रहे हो तो जो रात को आप सोने जाते हो ना सोने से 1 घंटे पहले अपने जितने भी नोट्स हैं होमवर्क हैं उन सबको आप कंप्लीट कर लो। पता है क्यों? क्योंकि जो हम सोने जाने वाले होते हैं उससे पहले ना हमारा दिमाग ऑलरेडी नींद में होता है। थकान महसूस हो रही होती है। इसकी वजह से अगर आप कुछ पढ़ोगे तो शायद आपको जल्दी नींद आ जाए। इस वजह से ये बोलते हैं कि सोने जाने से पहले आप बोरिंग काम करो। होमवर्क करो। उसमें ज्यादा दिमाग तो लगाना नहीं पड़ेगा। बस आपको लिखना ही तो होता है। इसलिए या तो आप रात को सोने से पहले अपना होमवर्क कर लेना और सबसे बेस्ट तरीका है कि आप स्कूल टाइम पे ही अपने होमवर्क को खत्म कर लो। ये पांच स्टेप है। इन पांच स्टेप को तुम्हें फॉलो करना होगा अगर तुम्हें एक टॉपर बनना है तो। अब एक सिंपल सी बात मैं बताता हूं। कुछ वन टू वन टिप देता जा रहा हूं। ठीक है? ये प्रशांत भैया की अपनी वन टू वन टिप है। तुम्हारे बड़े भाई की तरफ से मैं एक टिप दे रहा हूं। पहली टिप अवॉयड कल से माइंडसेट। ये जो तुम बोलते रहते हो ना। आज नहीं भैया वीडियो आज तो देख ली बट आज ना नींद आ रही है। ऐसा करते हैं टाइम टेबल ना कल से बनाएंगे। बहुत सारे बच्चे हैं अभी खाना खाते-खाते इस वीडियो को देख रहे हैं। उनको लग रहा है कि ये मूवी चल रही है। बेटा ये कोई मूवी नहीं चल रही है। ये तुम्हारे करियर के लिए बहुत इंपॉर्टेंट है। इसलिए जरा नोटबुक पेन लेकर आओ। आज से अप्लाई करो इन सारी चीजों को। अगली चीज अनरियलिस्टिक प्लान। कभी भी अपने गोल्स को अनरियलिस्टिक नहीं बनाना है कि भैया हम तो ना आज में ही सारा मैथ्स पढ़ लेंगे। सारी साइंस पढ़ लेंगे। सारी एसएसटी पढ़ लेंगे। ऐसा मत करना। ऐसा करोगे तो कभी भी प्लान को फॉलो नहीं कर पाओगे। एंड लास्ट फोकस ऑन प्रोडक्टिविटी। यानी तुम ये देखो कि क्या तुम प्रोडक्टिव हो। ऐसा तो नहीं है कि तुम 4 घंटे पढ़ रहे हो बट 4 घंटे में से तुम्हारा फोकस ही नहीं है। आधे समय तक तुम Instagram पे रील चला रहे हो। ऐसा तो कुछ नहीं है ना? फोकस है या नहीं है? ये खुद से सवाल पूछो। अगर इस रूल को फॉलो करते हो। इन पांच स्टेप को फॉलो करते हो। मैं गारंटी से बोल रहा हूं। ये टाइम टेबल तुम्हारी लाइफ के अंदर बहुत वैल्यू ऐड करेगा। अब जाओ इसको फॉलो करो। थैंक यू एवरीवन। मेरा नाम है प्रशांत। मिलते हैं नेक्स्ट वीडियो के अंदर। टेक केयर।