इसी मौसम में गांव वाला निकलता है खेतों की ओर जहां नई-नई चाय की पत्तियां खिली होती हैं। हर टहनी से वह नरमी से पत्तियां तोड़ता है और बांस की टोकरी में भरते जाता है। धूप में हल्का सुखाने के बाद इन पत्तियों को हथेलियों से धीरे-धीरे मसलता है ताकि उनमें छिपे तेल और सुगंध खुल जाए। फिर इन्हें कुछ घंटों के लिए छोड़ दिया जाता है। जहां हवा और समय मिलकर उन्हें हल्का सा फर्मेंट कर देते हैं। अब आती है सबसे अहम प्रक्रिया भुने जाने की