Fish Audio
Fish Audio
Início
Descoberta

Produtos

Estúdio de Histórias
Texto para voz
Clonagem de Voz
Efeitos Sonoros
Separação de Áudio
Fala para Texto
Novidades
Tutoriais
Atualize Agora
Devotional Chant Male

Devotional Chant Male

@Vivek Pandey
Utilizações0
Ações0
Gostos0
Salvo por0

एक समय की बात है, नारद मुनि ने भगवान विष्णु से कहा— "हे प्रभु! यह पृथ्वी कितनी सुंदर और समृद्ध है। मेरी भी इच्छा है कि मैं पृथ्वी पर जाकर वहाँ भ्रमण करूँ।" पृथ्वी पर आकर नारद मुनि ने बहुत सुंदर दृश्य देखे— हरे-भरे खेत, नदियाँ, गाँव और मनुष्य जीवन। लेकिन अब वे एक साधारण मनुष्य बन चुके थे… कुछ समय बाद उन्हें भूख लगने लगी। भूख से व्याकुल होकर उन्होंने पास के एक खेत में मटर की फसल देखी। जिज्ञासावश उन्होंने एक मटर की फली तोड़ी, जिसमें केवल तीन दाने थे… और उन्होंने उसे खा लिया। भगवान विष्णु ने उन्हें समझाया— "हे नारद! पृथ्वी पर जाना सरल नहीं है। वहाँ जाते ही तुम्हारी सारी दिव्य शक्तियाँ समाप्त हो जाएँगी, और तुम एक साधारण मनुष्य बन जाओगे।" लेकिन नारद मुनि नहीं माने। उन्होंने सोचा— "मुझे तो बस थोड़ी देर के लिए घूमकर वापस आना है।" और उन्होंने पृथ्वी पर जाने की अनुमति ले ली। पृथ्वी पर आकर नारद मुनि ने बहुत सुंदर दृश्य देखे— हरे-भरे खेत, नदियाँ, गाँव और मनुष्य जीवन। लेकिन अब वे एक साधारण मनुष्य बन चुके थे… कुछ समय बाद उन्हें भूख लगने लगी। भूख से व्याकुल होकर उन्होंने पास के एक खेत में मटर की फसल देखी। जिज्ञासावश उन्होंने एक मटर की फली तोड़ी, जिसमें केवल तीन दाने थे… और उन्होंने उसे खा लिया। तभी आकाशवाणी हुई— "हे नारद! तुमने किसान की अनुमति के बिना उसके खेत से मटर के तीन दाने खाए हैं। यह चोरी और पाप है। अब तुम्हें पृथ्वी पर तब तक रहना होगा, जब तक तुम इस तीन दानों का ऋण नहीं चुका देते।" यह सुनते ही नारद मुनि चिंतित हो गए। उन्होंने तुरंत करुण स्वर में भगवान विष्णु को पुकारा। अपने भक्त की पुकार सुनकर भगवान विष्णु प्रकट हुए। नारद मुनि ने पूरी घटना बताई और बोले— "हे प्रभु! मुझ पर कृपा करें और इस पाप से मुक्ति का मार्ग बताइए।" भगवान विष्णु ने कहा— *"हे नारद! अपराध तुमने किया है, इसका फल भी तुम्हें ही भोगना होगा। तुम उस किसान के घर जाओ और उससे कहो— ‘मैं असहाय हूँ, कृपया मुझे अपने घर में आश्रय दें। बदले में मैं आपके सभी कार्य करूँगा।’ लेकिन ध्यान रखना— जिस दिन वह तुमसे तुम्हारा नाम या परिचय पूछेगा, उसी दिन तुम मुक्त हो जाओगे।"* नारद मुनि किसान के घर गए और वैसा ही किया। किसान ने सोचा— "दो वक्त के भोजन के बदले एक सेवक मिल गया।" और उसने नारद को अपने घर रख लिया। अब नारद मुनि घर के सारे काम करने लगे— झाड़ू-पोंछा, पशुओं की सेवा, खेतों में मेहनत… समय बीतता गया… नारद मुनि मन ही मन प्रार्थना करते— "हे प्रभु! कब यह मुझसे मेरा परिचय पूछेगा?" लेकिन किसान ने कभी उनका नाम नहीं पूछा। समय के साथ किसान वृद्ध हुआ और मृत्यु के करीब पहुँचा। उसने अपने पुत्र से कहा— "मेरे बाद इस सेवक से उसका नाम मत पूछना, नहीं तो यह चला जाएगा और सारा काम तुम्हें करना पड़ेगा।" किसान के बाद उसका पुत्र भी वैसा ही करता रहा… और फिर उसका भी पुत्र… इस प्रकार नारद मुनि को तीन पीढ़ियों तक सेवा करनी पड़ी। तीसरी पीढ़ी का पुत्र एक दिन जिज्ञासा से पूछ बैठा— "तुम कौन हो? तुम न बूढ़े होते हो, न बीमार… क्या तुम कोई साधारण मनुष्य नहीं हो?" यह सुनते ही नारद मुनि की आँखों में आँसू आ गए। वे बोले— "मैं तुम्हारा आभारी हूँ… तुमने मुझे इस बंधन से मुक्त कर दिया।" इतना कहते ही वे अंतर्धान हो गए। नारद मुनि वापस भगवान विष्णु के पास पहुँचे और बोले— "हे प्रभु! केवल तीन दाने खाने के लिए मुझे इतना बड़ा दंड क्यों मिला?" भगवान विष्णु बोले— *"हे नारद! तुमने बिना अनुमति के जो लिया, वह ऋण बन गया। इस संसार में यदि कोई मनुष्य किसी का ऋण लेता है— तो उसे कई गुना ब्याज सहित लौटाना पड़ता है… चाहे उसके लिए अनेक जन्म ही क्यों न लेने पड़ें।"* 🌸 कथा का संदेश 👉 कभी भी चोरी या बेईमानी से किसी का कुछ न लें 👉 यदि किसी से उधार लें, तो उसे अवश्य चुकाएँ 👉 बिना अनुमति लिया गया छोटा सा वस्तु भी बड़ा पाप बन सकता है

hi flagHIMasculinoJovemEntretenimentoEducacionalNarraçãoLimparQuenteExpressivoCalmoMedidoSuaveAmigávelRelaxadoEnergéticoNarrativaAnimadoMédioNarrativaHospedar
Público
há um mês
Utilizar a voz
Ainda não há amostras de áudio

Explorar modelos relacionados

Bh
Bhakti voice
Ne
Neeraj
Ne
Neeraj
re
rehan
kr
krishna
Yu
Yung
Ka
Katwa ji
Ka
Kannu yadav
Hi
Hindi Storyteller
Ak
Akshay
Bh
Bhari
Ki
Killixis