एक दिन हनुमान जी शहर की गली में घूम रहे थे। चारों तरफ दुकानों की खुशबू आ रही थी। तभी उन्हें गरम-गरम समोसे की खुशबू आती है। हनुमान जी उस खुशबू को सूंघते हुए एक समोसे की दुकान के पास पहुँच जाते हैं। अरे ओ समोसा वाले भैया, मुझे एक समोसा दे दो रे। बहुत दिनों से समोसा नहीं खाया रे। अबे पहले पैसे लेकर आ, फिर समोसा मिलेगा! अरे मैं हनुमान हूँ रे। मुझे कोई पहचान क्यों नहीं पा रहा है रे? इतने में अचानक एक मोटा गुंडा वहाँ आता है और समोसा वाले को डराने लगता है। सुन! अगर इस दुकान को बचाना है तो मुझे हर रोज़ फ्री में समोसे देना होगा! समोसा वाला डर जाता है और कुछ बोल नहीं पाता। हनुमान जी यह सब देख रहे होते हैं। फिर हनुमान जी आगे बढ़ते हैं। अरे! गरीब आदमी को डराना बहुत गलत बात है! अगर इतना ही ताकतवर है तो मुझे हराकर दिखा! इतना सुनते ही दोनों के बीच लड़ाई शुरू हो जाती है। गुंडा हनुमान जी को पकड़ने की कोशिश करता है। लेकिन हनुमान जी बहुत तेज़ होते हैं। फिर हनुमान जी एक जोरदार छलांग लगाते हैं और गुंडे को उठाकर ज़ोर से जमीन पर पटक देते हैं। गुंडा डरकर भाग जाता है। समोसा वाला बहुत खुश हो जाता है। हनुमान जी, आपने मेरी दुकान बचा ली! फिर समोसा वाला हनुमान जी को गरम-गरम समोसे देता है। हनुमान जी मुस्कुराकर वह समोसे आसपास के गरीब बच्चों में बाँट देते हैं। जय श्री राम! जय श्री राम! दोस्तों, हमें हमेशा गरीब और जरूरतमंद लोगों की मदद करनी चाहिए। अगर आपको यह कहानी पसंद आई हो तो लाइक और सब्सक्राइब ज़रूर करना।