एक छोटे से गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का रहता था। वह बहुत गरीब था, लेकिन उसके सपने बहुत बड़े थे। उसके पिता किसान थे, लेकिन कई सालों से बारिश कम होने के कारण फसल ठीक से नहीं हो रही थी। एक दिन अर्जुन के पिता ने उसे एक छोटा सा बीज दिया और कहा, “बेटा, यह हमारे पास बचा हुआ आखिरी बीज है। इसे संभाल कर बोना। यही हमारी उम्मीद है।” अर्जुन ने उस बीज को अपने खेत के सबसे अच्छे हिस्से में बो दिया। हर दिन वह उसे पानी देता, उससे बातें करता और कहता, “तुम जरूर उगोगे, क्योंकि तुम्हारे साथ मेरी मेहनत और विश्वास है।” गाँव वाले उसका मज़ाक उड़ाते थे। “एक बीज से क्या होगा?” वे हँसते थे। लेकिन अर्जुन ने हार नहीं मानी। कुछ हफ्तों बाद, मिट्टी से एक छोटा सा हरा अंकुर निकला। अर्जुन की आँखों में खुशी के आँसू आ गए। धीरे-धीरे वह पौधा बड़ा हुआ और उस पर कई फल लगे। उस एक बीज से इतनी फसल हुई कि अर्जुन का परिवार फिर से खड़ा हो गया। गाँव वाले हैरान थे। अर्जुन ने मुस्कुराकर कहा, “चमत्कार बीज में नहीं था, चमत्कार विश्वास और मेहनत में था।”