Ladu Lal Baheti
von Shunyatax Mediaबैकग्राउंड म्यूजिक: सुखद और प्रेरणादायक
दृश्य: पुराने भारत की झलकियाँ, ग्रामीण और शहरी परिवेश के फुटेज के साथ
वॉयसओवर (मैं समय हूं शैली में): "आओ मैं तुम्हें एक कहानी सुनाता हूँ, यह भारत है, वह भारत नहीं जिसे तुम जानते हो, बल्कि वह भारत जिसकी चर्चाएँ हर कोई करता है। यह कहानी है मेरे जन्म से लेकर मेरे अंतिम समय तक की। मैंने अपना जन्म 25 अक्टूबर 1933 को मेवाड़ में लिया, जब भारत अभी भी अंग्रेजों के अधीन था।"
दृश्य: पुराने समय के खेल खेलते हुए बच्चों के चित्र, जैसे गिल्ली-डंडा, कंचे, और लट्टू।
वॉयसओवर: "उस समय के खेल न केवल मनोरंजन के साधन थे, बल्कि वे हमें जीवन की महत्वपूर्ण सीख भी देते थे। मेरी माँ मुझे हर छोटी-बड़ी इच्छा पूरी करने के लिए हमेशा तैयार रहतीं।"
दृश्य: मिठाइयों और चटपटे खानों की तैयारी और उन्हें खाते हुए बच्चे।
वॉयसओवर: "बचपन से ही मुझे मीठा खाना बहुत पसंद था, और मसालेदार खाने का चटखारा लेना भी। जैसे ही हाथ में एक या दो आना आता, मैं उसे तुरंत खर्च कर देता।"
दृश्य: बाजार की चहल-पहल, बच्चा दुकानदार से मिठाई खरीदते हुए।
वॉयसओवर: "मेरी हर छोटी-बड़ी ख्वाहिश का ख्याल रखा जाता था, और यही वजह थी कि मैं अपने बचपन को बेहद खुशहाल मानता हूँ।"
वॉयसओवर: "मेरी याददाश्त फोटोग्राफिक थी, जिसे एक बार देख लिया वो कभी नहीं भूलता। स्कूल जाता था और वहाँ अंग्रेजी भी सीखी थी।"
दृश्य: स्कूल की कक्षा, पुस्तकें पढ़ते हुए और शिक्षक अंग्रेजी पढ़ाते हुए।
वॉयसओवर: "शिवजी का बहुत बड़ा भक्त था, भीलवाड़ा के हरणी महादेव मंदिर जाता था और अपने हाथों से रोज़ाना शिवजी को जल चढ़ाता।"
दृश्य: हरणी महादेव मंदिर के दर्शन, जल चढ़ाते हुए।
वॉयसओवर: "मैं जो सोच लेता था, वह हर हाल में करके ही मानता। मैथ्स में सबसे ज़्यादा होशियार था। उस समय ब्रिटिश आर्मी के जनरल टोड भीलवाड़ा आए थे, जो बाज़ार नंबर 3 और स्टेशन रोड पर आए थे क्योंकि पहले सिर्फ वही रोड थे। उन्होंने कहा था कि हिन्दुओं यहाँ प्लॉट ले लो, यह ज़मीन सोने से भी ज़्यादा कीमती हो जाएगी। वह बात मैंने अपने मन में बैठा ली और सोच लिया कि यहाँ कुछ कारोबार करना है।"
दृश्य: उस समय के भीलवाड़ा के बाज़ार और सड़कें, जनरल टोड का भाषण।
वॉयसओवर: "मेरे पैर बचपन से ही घर में नहीं रहते थे, मैं दिनभर घूमता रहता था। यह सब शौक मेरे साथ आखिरी तक रहे।"
वॉयसओवर: "मेरे जीवन में कुछ खास मित्र भी थे, जिनके साथ मैं दिनभर खेलता और समय बिताता था। रामराय जी समदानी, रतन लाल जी सोमानी, ब्रजमोहन जी भदादा, प्रह्लाद जी डड, कल्याण जी, और मदन जी अग्रवाल। ये सभी मेरे जीवन के साथी थे, जो मेरे पूरे जीवन के दौरान मेरे साथ रहे।"
दृश्य: दोस्तों के साथ खेलते हुए और मस्ती करते हुए के दृश्य।
वॉयसओवर: "मेरी माँ एक बहादुर महिला थीं, जिनसे मुझे भी साहस की प्रेरणा मिली। मोहल्ले में जब भी कोई सांप निकलता, तो सभी मेरी माँ को बुलाते। वो हाथ से सांप को पकड़ लेती थीं और हमेशा मजबूत बनी रहती थीं।"
दृश्य: माँ सांप को हाथ से पकड़ते हुए।
वॉयसओवर: "सब कुछ खुशियों से भरा हुआ था, लेकिन जैसे ही स्वतंत्रता के बाद का भारत बदला, मेरे जीवन में भी एक बड़ी त्रासदी आई। जब मैं 16 साल का था, तब मेरे पिता का देहांत हो गया, जिससे मैं और मेरे भाई-बहन, साथ ही मेरी माँ पीछे रह गए। पहली बार मैंने अपनी माँ को रोते हुए देखा। मैं अंदर से टूट चुका था, समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूँ।"
दृश्य: परिवारिक त्रासदी के दृश्य, माँ के आँसू।
वॉयसओवर: "विरासत में मिली थी उधार वसूली की पर्ची। जब मैं उसके पास गया, तो उसने भी हाथ खड़े कर दिए थे। तब मैंने दिन-रात मेहनत की, और इसी वजह से मुझे स्कूल 10वीं के बाद ही छोड़नी पड़ी और व्यापार में कदम रखा।"
दृश्य: कार्य करते हुए, व्यापार शुरू करते हुए।
वॉयसओवर (अंतिम): "यही वो पल थे जब मेरी जिंदगी ने एक नया मोड़ लिया। इस तरह मैंने अपनी जिंदगी की नई शुरुआत की, जहाँ हर दिन एक नई चुनौती थी, पर मैंने कभी हार नहीं मानी।"