हरि ओम, राधे-राधे! प्यारे दोस्तों, रामायण में एक ऐसी घटना आती है जो यह साबित करती है कि भगवान को बड़े-बड़े अनुष्ठान या पूजा-पाठ से ज्यादा केवल एक सच्चे और निर्मल प्रेम की भूखे होते हैं। बात तब की है जब भगवान श्री राम माता सीता की खोज में वन-वन भटक रहे थे, तब वे दंडकारण्य के जंगलों में माता शबरी की कुटिया पर पहुंचे। शबरी बूढ़ी हो चुकी थीं, उनके नेत्र कमजोर हो चुके थे, लेकिन उनके दिल में अपने प्रभु श्री राम के आने का अटूट विश्वास था। रोज सुबह उठकर वे रास्ता साफ करतीं और कंकड़-पत्थर चुनकर रास्ते को फूलों से सजाती थीं कि आज उनके राम आएंगे। और जब भगवान राम उनकी कुटिया में आए, तो शबरी की आंखों से प्रेम के आंसू बह निकले। उन्होंने अपने झूठे बेर भगवान को बड़े प्रेम से खिलाए। लक्ष्मण जी ने शायद झिझक महसूस की हो, लेकिन मर्यादा पुरुषोत्तम राम ने बड़े चाव से वे बेर खाए और शबरी को गले लगाकर यह संदेश दिया कि ईश्वर के यहाँ जात-पात, ऊंच-नीच या दिखावा कोई मायने नहीं रखता, केवल सच्ची भक्ति मायने रखती है। दोस्तों, शबरी का यह प्रसंग हमें सिखाता है कि अगर आपका दिल साफ है और भगवान पर अटूट भरोसा है, तो प्रभु आपकी पुकार सुनने जरूर आएंगे। अगर आपको आज की यह कथा अच्छी लगी हो, तो वीडियो को लाइक करें और चैनल को सब्सक्राइब करें। मिलते हैं अगली वीडियो में, तब तक के लिए जय श्री राम!