Fish Audio
Fish Audio
Home
Discovery

Products

Story Studio
Text To Speech
Create Voice
Sound Effects
Image & VideoNew
Audio Separation
Speech to Text
What's New
Tutorials
Upgrade Now
Bhakti voice

Bhakti voice

@dibife9916
Uses0
Shares1
Likes0
Saved by0

श्री कृष्ण कहते हैं, जब मन बहुत दुखी होता है, तब संसार की सबसे सुंदर चीजें भी फीकी लगने लगती हैं। व्यक्ति लोगों के बीच रहकर भी अकेला महसूस करता है। वह मुस्कुराता तो है, लेकिन उसकी मुस्कान के पीछे छिपे आँसुओं को कोई नहीं देख पाता। याद रखो, हर वह इंसान जो बाहर से मजबूत दिखाई देता है, जरूरी नहीं कि भीतर से भी उतना ही मजबूत हो। कई बार सबसे अधिक टूटे हुए लोग ही सबसे अधिक मुस्कुराने की कोशिश करते हैं ताकि कोई उनके दर्द को पहचान न सके। यदि आज तुम्हारा मन दुखी है, तो सबसे पहले स्वयं को दोष देना बंद कर दो। जीवन में हर दुख तुम्हारी गलती का परिणाम नहीं होता। कुछ दुख ऐसे भी होते हैं जो तुम्हें पहले से अधिक मजबूत, अधिक धैर्यवान और अधिक समझदार बनाने के लिए आते हैं। जैसे सोने को आभूषण बनने से पहले अग्नि में तपना पड़ता है, वैसे ही मनुष्य को भी अपने वास्तविक स्वरूप तक पहुँचने से पहले कठिन समय से गुजरना पड़ता है। एक बार एक छोटा बालक अपने पिता के पास रोते हुए आया। उसने कहा, "पिताजी, मेरे साथ ही हमेशा बुरा क्यों होता है?" पिता उसे अपने साथ बगीचे में ले गए। वहाँ एक गुलाब का पौधा था, जिसके चारों ओर काँटे थे। पिता ने पूछा, "क्या तुम केवल काँटे देख रहे हो या फूल भी?" बालक बोला, "पहले तो मुझे केवल काँटे दिखाई दे रहे थे, लेकिन अब मैं फूल भी देख रहा हूँ।" पिता मुस्कुराए और बोले, "जीवन भी ऐसा ही है। जब मन दुख से भर जाता है, तब उसे केवल काँटे दिखाई देते हैं। लेकिन जब मन शांत होता है, तब वही जीवन फूलों से भरा हुआ दिखाई देता है।" मित्रों, दुख का सबसे बड़ा कारण केवल परिस्थितियाँ नहीं होतीं, बल्कि उन परिस्थितियों को देखने का हमारा दृष्टिकोण होता है। यदि मन हर समय यही सोचता रहेगा कि मेरे साथ ही ऐसा क्यों हुआ, तो दुख और गहरा होता जाएगा। लेकिन जिस दिन मन यह पूछना शुरू कर देगा कि इस घटना से मुझे क्या सीख मिली, उसी दिन से दुख धीरे-धीरे शक्ति में बदलने लगेगा। श्री कृष्ण कहते हैं, संसार में कोई भी व्यक्ति ऐसा नहीं है जिसके जीवन में कठिनाइयाँ न आई हों। अंतर केवल इतना है कि कुछ लोग कठिनाइयों के सामने टूट जाते हैं और कुछ लोग उन्हीं कठिनाइयों को अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लेते हैं। याद रखो, रात जितनी गहरी होती है, सूर्योदय उतना ही निकट होता है। आज बहुत से लोग अपने मन की बात किसी से कह नहीं पाते। उन्हें लगता है कि कोई उन्हें समझेगा नहीं। इसलिए वे अपने आँसुओं को अपने तक ही सीमित रख लेते हैं। लेकिन मन का दर्द जितना दबाया जाता है, उतना ही भीतर फैलता जाता है। इसलिए अपने मन को भगवान के सामने खोलना सीखो। ईश्वर के सामने बहाए गए आँसू कभी व्यर्थ नहीं जाते। वह मौन की भाषा भी समझते हैं। एक वृद्ध साधु नदी के किनारे बैठे थे। उनके पास एक युवक आया और बोला, "गुरुदेव, मेरा मन हर समय दुखी रहता है। मुझे कहीं शांति नहीं मिलती।" साधु ने उसे एक गिलास पानी दिया और उसमें एक मुट्ठी नमक डाल दिया। फिर बोले, "इसे पीकर बताओ।" युवक ने पानी पिया और तुरंत थूक दिया। उसने कहा, "यह तो बहुत कड़वा है।" साधु उसे पास की झील तक ले गए और उतना ही नमक झील में डाल दिया। फिर बोले, "अब इसका पानी पियो।" युवक ने पानी पिया और कहा, "यह तो बिल्कुल मीठा है।" साधु मुस्कुराकर बोले, "दुख वही नमक है। यदि तुम्हारा मन छोटे गिलास जैसा होगा, तो थोड़ा सा दुख भी असहनीय लगेगा। लेकिन यदि तुम्हारा मन झील जैसा विशाल हो जाएगा, तो वही दुख तुम्हें तोड़ नहीं पाएगा।" मित्रों, अपने मन को बड़ा बनाइए। छोटी-छोटी बातों को दिल पर लगाना छोड़ दीजिए। हर व्यक्ति आपकी अपेक्षाओं के अनुसार व्यवहार नहीं करेगा। हर रिश्ता हमेशा वैसा नहीं रहेगा जैसा पहले था। हर सपना तुरंत पूरा नहीं होगा। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि जीवन समाप्त हो गया। इसका अर्थ केवल इतना है कि ईश्वर अभी तुम्हें कुछ और सिखाना चाहते हैं। श्री कृष्ण कहते हैं, जब तुम्हारा मन बहुत दुखी हो, तब किसी से बदला लेने की नहीं, बल्कि स्वयं को संभालने की कोशिश करो। क्योंकि क्रोध में लिया गया हर निर्णय बाद में पछतावे का कारण बनता है। जो व्यक्ति अपने दुख के समय भी अपने संस्कार नहीं छोड़ता, वही वास्तव में महान होता है। याद रखो, संसार में सबसे कठिन युद्ध बाहर का नहीं, अपने मन का होता है। बाहर के शत्रु तुम्हें कुछ समय के लिए परेशान कर सकते हैं, लेकिन मन के भीतर बैठी निराशा वर्षों तक तुम्हें थका सकती है। इसलिए हर दिन अपने मन को अच्छे विचारों से भरना सीखो। जैसे शरीर को स्वस्थ रखने के लिए भोजन आवश्यक है, वैसे ही मन को स्वस्थ रखने के लिए सत्संग, प्रार्थना और अच्छे विचार आवश्यक हैं। कई लोग कहते हैं कि भगवान उनकी प्रार्थना नहीं सुनते। लेकिन सत्य यह है कि ईश्वर हर प्रार्थना सुनते हैं। केवल उनका उत्तर हमारे समय के अनुसार नहीं, बल्कि हमारे हित के अनुसार आता है। जिस बच्चे को माँ तुरंत हर चीज़ नहीं देती, इसका अर्थ यह नहीं कि माँ उससे प्रेम नहीं करती। वह केवल सही समय का इंतज़ार करती है। ठीक उसी प्रकार ईश्वर भी तुम्हें वही देते हैं जो सही समय पर तुम्हारे लिए सबसे उचित होता है। इसलिए यदि आज तुम्हारा मन बहुत दुखी है, तो निराश मत होना। यह समय भी बीत जाएगा। बादल कभी स्थायी नहीं रहते। आँधी हमेशा नहीं चलती। अंधेरी रात भी अंत में सुबह को रास्ता दे देती है। तुम्हें केवल इतना करना है कि अपने विश्वास को टूटने मत देना। क्योंकि जिस मन में विश्वास जीवित रहता है, वहाँ आशा कभी समाप्त नहीं होती। श्री कृष्ण कहते हैं, जब मन बहुत दुखी होता है, तब संसार की सबसे सुंदर चीजें भी फीकी लगने लगती हैं। व्यक्ति लोगों के बीच रहकर भी अकेला महसूस करता है। वह मुस्कुराता तो है, लेकिन उसकी मुस्कान के पीछे छिपे आँसुओं को कोई नहीं देख पाता। याद रखो, हर वह इंसान जो बाहर से मजबूत दिखाई देता है, जरूरी नहीं कि भीतर से भी उतना ही मजबूत हो। कई बार सबसे अधिक टूटे हुए लोग ही सबसे अधिक मुस्कुराने की कोशिश करते हैं ताकि कोई उनके दर्द को पहचान न सके। यदि आज तुम्हारा मन दुखी है, तो सबसे पहले स्वयं को दोष देना बंद कर दो। जीवन में हर दुख तुम्हारी गलती का परिणाम नहीं होता। कुछ दुख ऐसे भी होते हैं जो तुम्हें पहले से अधिक मजबूत, अधिक धैर्यवान और अधिक समझदार बनाने के लिए आते हैं। जैसे सोने को आभूषण बनने से पहले अग्नि में तपना पड़ता है, वैसे ही मनुष्य को भी अपने वास्तविक स्वरूप तक पहुँचने से पहले कठिन समय से गुजरना पड़ता है। एक बार एक छोटा बालक अपने पिता के पास रोते हुए आया। उसने कहा, "पिताजी, मेरे साथ ही हमेशा बुरा क्यों होता है?" पिता उसे अपने साथ बगीचे में ले गए। वहाँ एक गुलाब का पौधा था, जिसके चारों ओर काँटे थे। पिता ने पूछा, "क्या तुम केवल काँटे देख रहे हो या फूल भी?" बालक बोला, "पहले तो मुझे केवल काँटे दिखाई दे रहे थे, लेकिन अब मैं फूल भी देख रहा हूँ।" पिता मुस्कुराए और बोले, "जीवन भी ऐसा ही है। जब मन दुख से भर जाता है, तब उसे केवल काँटे दिखाई देते हैं। लेकिन जब मन शांत होता है, तब वही जीवन फूलों से भरा हुआ दिखाई देता है।" मित्रों, दुख का सबसे बड़ा कारण केवल परिस्थितियाँ नहीं होतीं, बल्कि उन परिस्थितियों को देखने का हमारा दृष्टिकोण होता है। यदि मन हर समय यही सोचता रहेगा कि मेरे साथ ही ऐसा क्यों हुआ, तो दुख और गहरा होता जाएगा। लेकिन जिस दिन मन यह पूछना शुरू कर देगा कि इस घटना से मुझे क्या सीख मिली, उसी दिन से दुख धीरे-धीरे शक्ति में बदलने लगेगा। श्री कृष्ण कहते हैं, संसार में कोई भी व्यक्ति ऐसा नहीं है जिसके जीवन में कठिनाइयाँ न आई हों। अंतर केवल इतना है कि कुछ लोग कठिनाइयों के सामने टूट जाते हैं और कुछ लोग उन्हीं कठिनाइयों को अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लेते हैं। याद रखो, रात जितनी गहरी होती है, सूर्योदय उतना ही निकट होता है। आज बहुत से लोग अपने मन की बात किसी से कह नहीं पाते। उन्हें लगता है कि कोई उन्हें समझेगा नहीं। इसलिए वे अपने आँसुओं को अपने तक ही सीमित रख लेते हैं। लेकिन मन का दर्द जितना दबाया जाता है, उतना ही भीतर फैलता जाता है। इसलिए अपने मन को भगवान के सामने खोलना सीखो। ईश्वर के सामने बहाए गए आँसू कभी व्यर्थ नहीं जाते। वह मौन की भाषा भी समझते हैं। एक वृद्ध साधु नदी के किनारे बैठे थे। उनके पास एक युवक आया और बोला, "गुरुदेव, मेरा मन हर समय दुखी रहता है। मुझे कहीं शांति नहीं मिलती।" साधु ने उसे एक गिलास पानी दिया और उसमें एक मुट्ठी नमक डाल दिया। फिर बोले, "इसे पीकर बताओ।" युवक ने पानी पिया और तुरंत थूक दिया। उसने कहा, "यह तो बहुत कड़वा है।" साधु उसे पास की झील तक ले गए और उतना ही नमक झील में डाल दिया। फिर बोले, "अब इसका पानी पियो।" युवक ने पानी पिया और कहा, "यह तो बिल्कुल मीठा है।" साधु मुस्कुराकर बोले, "दुख वही नमक है। यदि तुम्हारा मन छोटे गिलास जैसा होगा, तो थोड़ा सा दुख भी असहनीय लगेगा। लेकिन यदि तुम्हारा मन झील जैसा विशाल हो जाएगा, तो वही दुख तुम्हें तोड़ नहीं पाएगा।" मित्रों, अपने मन को बड़ा बनाइए। छोटी-छोटी बातों को दिल पर लगाना छोड़ दीजिए। हर व्यक्ति आपकी अपेक्षाओं के अनुसार व्यवहार नहीं करेगा। हर रिश्ता हमेशा वैसा नहीं रहेगा जैसा पहले था। हर सपना तुरंत पूरा नहीं होगा। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि जीवन समाप्त हो गया। इसका अर्थ केवल इतना है कि ईश्वर अभी तुम्हें कुछ और सिखाना चाहते हैं। श्री कृष्ण कहते हैं, जब तुम्हारा मन बहुत दुखी हो, तब किसी से बदला लेने की नहीं, बल्कि स्वयं को संभालने की कोशिश करो। क्योंकि क्रोध में लिया गया हर निर्णय बाद में पछतावे का कारण बनता है। जो व्यक्ति अपने दुख के समय भी अपने संस्कार नहीं छोड़ता, वही वास्तव में महान होता है। याद रखो, संसार में सबसे कठिन युद्ध बाहर का नहीं, अपने मन का होता है। बाहर के शत्रु तुम्हें कुछ समय के लिए परेशान कर सकते हैं, लेकिन मन के भीतर बैठी निराशा वर्षों तक तुम्हें थका सकती है। इसलिए हर दिन अपने मन को अच्छे विचारों से भरना सीखो। जैसे शरीर को स्वस्थ रखने के लिए भोजन आवश्यक है, वैसे ही मन को स्वस्थ रखने के लिए सत्संग, प्रार्थना और अच्छे विचार आवश्यक हैं। कई लोग कहते हैं कि भगवान उनकी प्रार्थना नहीं सुनते। लेकिन सत्य यह है कि ईश्वर हर प्रार्थना सुनते हैं। केवल उनका उत्तर हमारे समय के अनुसार नहीं, बल्कि हमारे हित के अनुसार आता है। जिस बच्चे को माँ तुरंत हर चीज़ नहीं देती, इसका अर्थ यह नहीं कि माँ उससे प्रेम नहीं करती। वह केवल सही समय का इंतज़ार करती है। ठीक उसी प्रकार ईश्वर भी तुम्हें वही देते हैं जो सही समय पर तुम्हारे लिए सबसे उचित होता है। इसलिए यदि आज तुम्हारा मन बहुत दुखी है, तो निराश मत होना। यह समय भी बीत जाएगा। बादल कभी स्थायी नहीं रहते। आँधी हमेशा नहीं चलती। अंधेरी रात भी अंत में सुबह को रास्ता दे देती है। तुम्हें केवल इतना करना है कि अपने विश्वास को टूटने मत देना। क्योंकि जिस मन में विश्वास जीवित रहता है, वहाँ आशा कभी समाप्त नहीं होती

hi flagHIMaleMiddle AgedNarrationEducationalEntertainmentDeepCalmMeasuredAuthoritativeWarmClearExpressiveStorytelling
Public
a month ago
Use Voice
There's no audio samples yet

Explore Related Models

Mu
Music my
शा
शांत पुरुष आवाज
mu
mufti ment
An
Antoni
Ga
Gana
Nu
Nur1
Yo
Young Male Narrator
os
osho voice
Au
Aus
प्
प्रेमानंद महाराज
Ay
Ayush
re
rehan