Abhaygamer
Abhaygame에 의해भूतिया कहानी: "पुरानी हवेली का रहस्य"
गाँव के बाहर एक पुरानी हवेली थी, जिसके बारे में लोगों के बीच डरावनी कहानियाँ प्रचलित थीं। कहा जाता था कि वहाँ रात के समय अजीब-अजीब आवाजें आती थीं, और जिसने भी रात में उस हवेली में कदम रखा, वो कभी लौटकर नहीं आया।
एक दिन गाँव के दो युवक, रवि और मोहन, ने उस हवेली के रहस्य का पता लगाने का निश्चय किया। गाँव के बुजुर्गों ने उन्हें मना किया, लेकिन वे दोनों नहीं माने। एक अंधेरी रात को टॉर्च और लाठी लेकर वे हवेली की ओर चल पड़े।
जैसे ही उन्होंने हवेली का भारी दरवाज़ा खोला, ज़ोर की चीख की आवाज़ आई। रवि और मोहन डर गए, लेकिन हिम्मत करके अंदर घुसे। हवेली के अंदर धूल जमी थी, दीवारों पर मकड़ियों के जाले लगे थे। अचानक एक खिड़की अपने आप ज़ोर से बंद हो गई। दोनों सहम गए लेकिन आगे बढ़ते रहे।
तभी उन्हें सीढ़ियों के पास एक सफेद साड़ी में लिपटी एक परछाईं दिखाई दी। उस परछाईं ने धीरे-धीरे उनकी ओर बढ़ना शुरू किया। रवि ने टॉर्च की रोशनी डाली तो देखा कि वह एक बूढ़ी औरत की आत्मा थी, जिसकी आँखें लाल चमक रही थीं। मोहन ने चिल्लाकर भागने की कोशिश की, लेकिन उसके पैर जम गए।
बूढ़ी औरत ने कराहते हुए कहा, "मेरी हत्या इस हवेली में हुई थी। मुझे इंसाफ चाहिए।" रवि और मोहन ने डरते हुए पूछा, "तुम्हारी हत्या किसने की थी?"
उस आत्मा ने एक कमरे की ओर इशारा किया। दोनों ने हिम्मत करके उस कमरे का दरवाज़ा खोला तो वहाँ एक पुराना संदूक मिला। जब उन्होंने संदूक खोला, तो उसमें एक खून से सना हुआ खंजर और एक पुराना पत्र मिला, जिसमें हवेली के मालिक का नाम लिखा था। पता चला कि हवेली के मालिक ने ही लालच में आकर उस बूढ़ी औरत की हत्या की थी।
जैसे ही रवि और मोहन ने यह सच बाहर लाकर गाँववालों को बताया, आत्मा ने मुस्कुराते हुए कहा, "अब मुझे मुक्ति मिल गई।" और वह सफेद धुएँ में बदलकर गायब हो गई।
इसके बाद हवेली से अजीब आवाज़ें आना बंद हो गईं, लेकिन गाँववाले आज भी कहते हैं कि कभी-कभी रात के सन्नाटे में हवेली से किसी के हंसने की आवाज़ आती है…
क्या तुमने भी हवेली की ओर से आती उन आवाज़ों को सुना है?